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CG बिलासपुर में मां महामाया देवी मंदिर का ऐतिहासिक कहानी

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महामाया मंदिर बिलासपुर शहर के एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो छत्तीसगढ़ राज्य, भारत में स्थित है। यह मंदिर भगवानी महामाया को समर्पित है, जो छत्तीसगढ़ की माता के रूप में प्रसिद्ध हैं। मंदिर विशाल भूमिकारूपी स्थल पर स्थित है और विश्वस्तरीय धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

इस मंदिर का निर्माण पुरातात्विक महत्त्व रखता है और इसकी वास्तुकला और सुंदर आराम्भिक गोपुरम् इसे और भी आकर्षक बनाते हैं। मंदिर के विभिन्न स्तम्भों, मंचों और मण्डपों की सुंदरता दर्शकों को मोह लेती है। इसके अलावा, मंदिर के भीतर खुदाई से प्राप्त हुए कई पुरातात्विक आवशेषों को देखने का भी अवसर मिलता है।

महामाया मंदिर का इतिहास

महामाया मंदिर का निर्माण सन् 1975 में शुरू हुआ था और विभिन्न निर्माण कार्यों के बाद 1980 में पूर्ण रूप से सम्पन्न हुआ। इस मंदिर का निर्माण और विस्तार भगवानी महामाया की कृपा और भक्तों के समर्पण के बाद संभव हुआ। मंदिर की स्थापना को लेकर एक श्रीमती धर्मपत्नी को देवी माता ने सपने में दर्शन दिए थे, जिसके बाद उन्होंने मंदिर की निर्माण कार्यवाही की।

मंदिर की महिला समर्थ समिति द्वारा संचालित होता है और यह धार्मिक गतिविधियों, पूजाओं और आराधना के लिए विख्यात है। महामाया मंदिर आयोजित माता रानी मेला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों के लिए भी जाना जाता है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु इकट्ठे होते हैं।

महामाया मंदिर की विशेषताएँ

महामाया मंदिर का वास्तुकला विदेशों से आए स्थापत्य कलाकारों ने निर्माण किया है। इसकी महिला समर्थ समिति द्वारा संचालित होने के कारण यह मंदिर अत्यंत सुरक्षित और स्वच्छ रखा जाता है।

मंदिर में प्रवेश करने के लिए द्वारावर्ष का उपयोग किया गया है, जिसे विशेष रूप से दर्शकों की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है। मंदिर के बाहरी सभी प्रवेश द्वारों के निकट अलंकारित पर्यावरण, फव्वारे और वृक्षों से युक्त है, जो दर्शकों को मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण में आत्मीयता का अनुभव कराते हैं।

मंदिर का प्रमुख गोपुरम् सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह गोपुरम् मंदिर के विभिन्न भागों को अलग करने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही, मंदिर के अंदर एक छोटे से समाधि मंदिर और ध्यान कक्ष भी हैं, जहां श्रद्धालु ध्यान और मेधावी विचारों में लीन हो सकते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व

महामाया मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यह धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ आराम्भिक पाठशालाएं, योग शिविर और संस्कृति प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी प्रदान करता है। यहां प्रतिवर्ष नवरात्रि और दिवाली के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें श्रद्धालु भक्तजन खुदाई रोपने की परंपरा को भी मान्यता देते हैं।

यहां कई धार्मिक और सांस्कृतिक महोत्सव भी मनाए जाते हैं, जिनमें श्रद्धालु और पर्यटक भाग लेते हैं। इन महोत्सवों में रामनवमी, महाशिवरात्रि, नवरात्रि, दीपावली, नग पंचमी आदि शामिल हैं। ये त्योहार जीवंत और उत्साहभरे होते हैं और इनमें भक्तजन धार्मिक कार्यक्रमों, कीर्तन, भजन और प्रवचनों में भाग लेते हैं।

पर्यटन का केंद्र

महामाया मंदिर बिलासपुर छत्तीसगढ़ राज्य का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां वर्षभर आने वाले अनेक पर्यटक और श्रद्धालु देश और विदेश से आते हैं। मंदिर के आस-पास के क्षेत्र में कई होटल और आवासीय सुविधाएं हैं, जो आरामदायक और सुरक्षित रहने की सुविधा प्रदान करते हैं।

इसके अलावा, बिलासपुर शहर के आसपास कई पर्यटन स्थल हैं जो यात्रियों को आकर्षित करते हैं। कांकेर, माहामया ज्वालामुखी मंदिर, तालाबगरी शक्तिपीठ, मंगलपुरी शक्तिपीठ, तालपुर, दुर्ग मंदिर, राजीव लोचन मंदिर, आरंग मंदिर, खरोदी मंदिर आदि इनमें से कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल हैं जो यहां के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

महामाया मंदिर बिलासपुर धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व के साथ-साथ पर्यटन का एक आदर्श स्थल है। यहां की सुंदरता, धार्मिकता और शांति यात्रियों को अपूर्व अनुभव प्रदान करती है। इसलिए, जब आप छत्तीसगढ़ राज्य में हों तो महामाया मंदिर को जरूर दर्शन करें और इस आध्यात्मिक स्थल की शांति और आनंद का आनंद उठाएं।

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